काल भैरव शराब क्यों स्वीकार करते हैं? जानिए इस रहस्य की पौराणिक कथा

परिचय

सनातन धर्म में भगवान काल भैरव को भगवान शिव का सबसे उग्र और रहस्यमय रूप माना गया है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में काल भैरव का विशेष स्थान है और यहाँ एक ऐसी परंपरा है जो पूरे भारत में अनोखी है — भगवान काल भैरव को मदिरा यानी शराब का भोग लगाया जाता है।

यह देखकर हर श्रद्धालु के मन में सवाल उठता है — आखिर एक देवता को शराब का भोग क्यों? क्या इसके पीछे कोई पौराणिक कथा है? आइए जानते हैं इस रहस्य का पूरा सच।


काल भैरव कौन हैं?

काल भैरव भगवान शिव के अष्ट भैरवों में सबसे प्रमुख हैं। इन्हें काशी के कोतवाल भी कहा जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत उग्र है। इनका वाहन काला कुत्ता है, हाथ में त्रिशूल और डमरू है, और इनकी आँखें अग्नि के समान लाल हैं।

काल भैरव समय के देवता हैं। काल का अर्थ है समय और मृत्यु — इसीलिए इन्हें काल भैरव कहा जाता है।


पौराणिक कथा — शराब का भोग क्यों?

ब्रह्मा का अहंकार और शिव का क्रोध

शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी को अहंकार हो गया कि वे ही सर्वश्रेष्ठ देवता हैं। उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया। इससे भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए और उनके क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ।

काल भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्मा के पाँचवें सिर को काट दिया। लेकिन ब्रह्मा का सिर काटने से काल भैरव को ब्रह्महत्या का पाप लग गया।

ब्रह्महत्या से मुक्ति

ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव को भिक्षाटन करना पड़ा — यानी घर-घर जाकर भिक्षा माँगनी पड़ी। उस समय उनके हाथ में ब्रह्मा की खोपड़ी थी।

जब वे काशी पहुँचे तो माँ अन्नपूर्णा ने उन्हें भिक्षा दी और भगवान विष्णु ने अपने रक्त से उनकी खोपड़ी भरी। तब जाकर काल भैरव को पाप से मुक्ति मिली।

मदिरा से जुड़ा रहस्य

तांत्रिक परंपरा के अनुसार काल भैरव की उपासना पंचमकार पद्धति से होती है जिसमें मदिरा एक प्रमुख तत्व है। मान्यता है कि मदिरा तमोगुण का प्रतीक है और काल भैरव तमोगुण के अधिष्ठाता देवता हैं।

उन्हें मदिरा का भोग लगाने से भय, रोग और शत्रु का नाश होता है। यह भोग सांकेतिक है — भक्त अपनी बुरी आदतें और अहंकार काल भैरव को समर्पित करते हैं।


उज्जैन में काल भैरव मंदिर का चमत्कार

उज्जैन के काल भैरव मंदिर में एक अद्भुत चमत्कार होता है। पुजारी जब काल भैरव की मूर्ति के मुँह से शराब का पात्र लगाते हैं तो शराब अपने आप अंदर चली जाती है।

यह चमत्कार आज भी लाखों श्रद्धालु अपनी आँखों से देखते हैं और वैज्ञानिक भी इसका कोई ठोस कारण नहीं बता पाए हैं।


काल भैरव की पूजा से क्या लाभ होता है?

भोगफल
मदिराशत्रु नाश, भय मुक्ति
काले तिलपाप नाश
नारियलमनोकामना पूर्ति
सरसों का तेलरोग नाश
काले वस्त्रकाल भैरव प्रसन्न होते हैं

काल भैरव की पूजा कब करें?

रविवार और मंगलवार को पूजा विशेष फलदायी होती है। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। रात्रि पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि काल भैरव रात्रि के देवता हैं।


निष्कर्ष

काल भैरव को शराब का भोग लगाना कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और तांत्रिक रहस्य छुपा है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि भगवान के सामने हम अपनी सभी बुराइयाँ, अहंकार और विकार समर्पित कर दें।

जय काल भैरव! जय महाकाल!

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