बेटी को ससुराल किस दिन नहीं भेजना चाहिए!

On which day the daughter should not be sent to her in-laws house

हिंदू माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी , एकादशी तथा पूर्णिमा तिथि के दिन बेटी को ससुराल नहीं भेजना चाहिए क्योंकि  दोनों ही तिथियों को वास्तु शास्त्र तथा प्राचीन मान्यताओं के आधार पर बेटी को ससुराल भेजने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। क्युकि आप इस दिन बेटी की बिदाई करती है तो वो खुशाहाल नहीं रहेगी और कठनाईयो का सामना करना पड़ता है 

The daughter should not visit her in-laws house on Shashti, Ekadashi and Purnima date of Shukla Paksha of the Hindu month because both the eclipses are not considered suitable for in-laws search on the basis of chain and ancient heritage. Because if you bid farewell to your daughter on this day, she is not happy and has to face difficulties.

बेटी को ससुराल भेजने का शुभ दिन कौन सा होता है

Which is the auspicious day to send daughter to her in-laws house?

बेटी को ससुराल भेजने के लिए सोमवार , बुधवार गुरुवार,और शुक्र्वार  के दिन को सर्वोत्तम माना गया है। इन तीनों ही वारों के दिन बेटी को ससुराल भेजना अच्छा था तथा शुभ होता है। और खुशहाल रहती है 

Monday, Wednesday, Thursday and Friday are considered the best days to send the daughter to her in-laws house. It was good and auspicious to send the daughter to her in-laws house on all these three days. and be happy

विदाई के समय इस मंत्र का जाप जरूर करे सफ़रता जरुर मिलता है 

Do chant this mantra at the time of farewell, you will definitely get success.

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई

Prabisi Nagar kije sab kaja. Hriday Rakhi Kosalpur Raja

Girl Sudha Ripu Karhin Mitai. Gopad Sindhu Anal Sitlai

किसी व्यक्ति के मायके से ससुराल नहीं जाने का निर्धारित दिन सामान्यतः किसी निश्चित दिन या तिथि पर आधारित नहीं होता है। यह स्थिति परिवार की संस्कृति, परंपरा और व्यक्ति के व्यक्तिगत वांछाओं पर निर्भर करेगी। कुछ परिवारों में, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में पुरुष विदेशी यात्रा पर जाते समय निश्चित दिनों पर व्रत रखते हैं जब महिला अपने मायके में रहती है। विवाहित महिलाएं अपने ससुराल में रहती हैं और अपने मायके में जाने के लिए अन्य सामान्य स्थितियों के अलावा विशेष दिनों का अपेक्षा कर सकती हैं, जैसे कि उनकी विवाहित जीवनसाथी की छुट्टी, त्योहार, परिवारिक समारोह आदि।

The prescribed day for a person not to go from his maternal home to his in-laws house is generally not based on a fixed day or date. This situation will depend on the culture, tradition of the family and the personal wishes of the individual. In some families, in the states of Bihar, Jharkhand, Uttar Pradesh etc. men go on foreign trips and observe fast on certain days when the women stay at their maternal home. Married women live with their in-laws and may expect special days to visit their maternal home, in addition to other common situations, such as their married spouse’s holiday, festivals, family celebrations, etc.

मेरी सलाह है कि आप अपने परिवार और संबंधियों के साथ चर्चा करें और उनकी सलाह लें ताकि आप और आपके पति के बीच सहमति पर आधारित एक उचित दिन चुन सकें। यह एक व्यक्तिगत और पारिवारिक निर्णय होगा,

I suggest you discuss with your family and relatives and take their advice so that you can choose a suitable day based on the consensus between you and your husband. It will be a personal and family decision,

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