॥श्रीऋण-हरण-कर्तृ-गणपति-स्तोत्र-मन्त्र॥

Shri Rin-Haran-Kartre Ganapati Stotra Mantra । श्रीऋण-हरण-कर्तृ-गणपति-स्तोत्र-मन्त्र ध्यान ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्। ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।। ।।मूल-पाठ।। सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फल-सिद्धये। सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।१ त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः। सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।२ हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः। सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।३ महिषस्य वधे देव्या गण-नाथः प्रपुजितः। […]

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श्री ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्रम | Shree Rinamukti Ganesha Stotram – कर्ज से मुक्ति के लिए

श्री ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्रम | Shree Rinamukti Ganesha Stotram विनियोग – अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपतिस्तोत्रमन्त्रस्य शुक्राचार्य ऋषि:, ऋणविमोचन महागणपतिर्देवता, अनुष्टुप छन्द:, ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ।                                                                                                       ऊँ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम । षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ।।1।। महागणपतिं वन्दे महासेतुं महाबलम । एकमेवाद्वितीयं तु नमामि ऋणमुक्तये ।।2।। एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम । महाविघ्नहरं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।3।। […]

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श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र | Sri Ganesh Pancharatnam Stotra – गणपति की उपासना

श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र Sri Ganesh Pancharatnam Stotra मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् । कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।  अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् । नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् । नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।  सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् । महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त […]

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श्रीगणेशस्तोत्र | Shri Ganesh Stotra – भगवान गणेश की स्तुति

श्रीगणेशस्तोत्र | Shri Ganesh Stotra ॥ श्रीगणेशस्तोत्र ॥ नारद उवाच । प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥ १॥ प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥ लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३॥ नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् । एकादशं गणपतिं […]

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Shri Ganadhisha Stotram Shiva Shakti Kritam | श्रीगणाधीशस्तोत्रं शिवशक्तिकृतम्

Shri Ganadhisha Stotram Shiva Shakti Kritam | श्रीगणाधीशस्तोत्रं शिवशक्तिकृतम् श्रीशक्तिशिवावूचतुः ।                                                                                                                                              नमस्ते गणनाथाय गणानां पतये नमः ।भक्तिप्रियाय देवेश भक्तेभ्यः सुखदायक ॥ १॥ स्वानन्दवासिने तुभ्यं सिद्धिबुद्धिवराय च । नाभिशेषाय देवाय ढुण्ढिराजाय ते नमः ॥ २॥ वरदाभयहस्ताय नमः परशुधारिणे । नमस्ते सृणिहस्ताय नाभिशेषाय ते नमः ॥ ३॥ अनामयाय सर्वाय सर्वपूज्याय ते नमः । सगुणाय […]

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श्री गणेशस्तुति | Shri Ganesh Stuti – विधि, महत्व और लाभ

श्री गणेशस्तुति | Shri Ganesh Stuti वन्दे गजेन्द्रवदनं वामाङ्कारूढवल्लभाश्लिष्टम् । कुङ्कुमरागशोणं कुवलयिनीजारकोरकापीडम् ॥ १॥ विघ्नान्धकारमित्रं शङ्करपुत्रं सरोजदलनेत्रम् । सिन्दूरारुणगात्रं सिन्धुरवक्त्रं नमाम्यहोरात्रम् ॥ २॥ गलद्दानगण्डं मिलद्भृङ्गषण्डं, चलच्चारुशुण्डं जगत्त्राणशौण्डम् ।  लसद्दन्तकाण्डं विपद्भङ्गचण्डं,शिवप्रेमपिण्डं भजे वक्रतुण्डम् ॥ ३॥ गणेश्वरमुपास्महे गजमुखं कृपासागरं, सुरासुरनमस्कृतं सुरवरं कुमाराग्रजम् । सुपाशसृणिमोदकस्फुटितदन्तहस्तोज्ज्वलं, शिवोद्भवमभीष्टदं श्रितततेस्सुसिद्धिप्रदम् ॥ ४॥    विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाट्,विघ्नव्यालकुलप्रमत्तगरुडोविघ्नेभपञ्चाननः।      विघ्नोत्तुङ्गगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाब्धिकुंभोद्भवः,विघ्नाघौघघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वरः पातु नः ॥ ५॥ […]

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पत्नी से किचाहिन के लाभ: एक नया दृष्टिकोण … Benefits-of-Kichahin-from-Wife

पत्नी से किचाहिन के लाभ: एक नया दृष्टिकोण आज मैं आपको एक अनोखी बात बताने वाला हूँ—पत्नी से किचाहिन करने के लाभ! अक्सर हमें रिश्तों के बारे में नकारात्मक बातें ही सुनने को मिलती हैं, लेकिन इस लेख में हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे किचाहिन (पत्नी से मनमुटाव) भी अपने आप में […]

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श्री गणेश भुजंगम | Ganesha Bhujangam: भगवान गणेश की स्तुति का शक्तिशाली मंत्र

श्री गणेश भुजंगम | Ganesha Bhujangam रणत्क्षुद्रघण्टानिनादाभिरामं चलत्ताण्डवोद्दण्डवत्पद्मतालम् ।                                                        लसत्तुन्दिलाङ्गोपरिव्यालहारं गणाधीशमीशानसूनुंतमीडे ॥ १॥ ध्वनिध्वंसवीणालयोल्लासिवक्त्रं स्फुरच्छुण्डदण्डोल्लसद्बीजपूरम् ।                                                गलद्दर्पसौगन्ध्यलोलालिमालं गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ २॥ प्रकाशज्जपारक्तरन्तप्रसून- प्रवालप्रभातारुणज्योतिरेकम ।                                                                                             प्रलम्बोदरं वक्रतुण्डैकदन्तं गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ३॥ विचित्रस्फुरद्रत्नमालाकिरीटं किरीटोल्लसच्चन्द्ररेखाविभूषम् ।                                                                                          विभूषैकभूशं भवध्वंसहेतुं गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ४॥ उदञ्चद्भुजावल्लरीदृश्यमूलो-च्चलद्भ्रूलताविभ्रमभ्राजदक्षम् ।                                                                         मरुत्सुन्दरीचामरैः सेव्यमानं गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ५॥ स्फुरन्निष्ठुरालोलपिङ्गाक्षितारं कृपाकोमलोदारलीलावतारम् ।                                                                                   […]

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गणपतिस्तवः पाठभेद | Ganapati Stavaha: श्री गणेश की स्तुति का प्राचीन पाठ

गणपतिस्तवः पाठभेद | Ganapati Stavaha ऋषिरुवाच ॥ अजं निर्विकल्पं निराकारमेकं निरानन्दमानन्दमद्वैतपूर्णम् ।                                                                                        परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीहं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥ १॥ गुणातीतमानं चिदानन्दरूपं चिदाभासकं सर्वगं ज्ञानगम्यम् ।                                                                    मुनिध्येयमाकाशरूपं परेशं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥ २॥ जगत्कारणं कारणज्ञानरूपं सुरादिं सुखादिं गुणेशं गणेशम् ।                                                                                   जगद्व्यापिनं विश्ववन्द्यं सुरेशं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥ ३॥ रजोयोगतो ब्रह्मरूपं […]

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