
All God Aarti in Hindi – सभी देवी-देवताओं की आरती संग्रह
हिंदू धर्म में आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्त प्रतिदिन सुबह और शाम अपने आराध्य देवी-देवताओं की आरती करते हैं। इस पेज पर भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, श्रीराम, हनुमान जी और माता दुर्गा सहित प्रमुख देवी-देवताओं की आरती एक ही स्थान पर पढ़ सकते हैं। यहाँ आरती के साथ मंत्र, पूजा विधि और धार्मिक महत्व की जानकारी भी मिलेगी।
इस पेज में सभी आरतियों की सूची
1. श्री गणेश जी की आरती – जय गणेश जय गणेश देवा
श्री गणेश जी की आरती – जय गणेश जय गणेश देवा
भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या मांगलिक अवसर की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से की जाती है। बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन भक्त विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। यहाँ श्री गणेश जी की प्रसिद्ध आरती हिंदी में दी गई है।
श्री गणेश जी की संपूर्ण आरती
जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ एकदंत दयावंत चार भुजाधारी। माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ ‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
श्री गणेश जी का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
यह भगवान गणेश का प्रसिद्ध बीज मंत्र है। भक्त पूजा के समय श्रद्धा से इसका जाप करते हैं।गणेश जी की पूजा कैसे करें?
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- फूल, दूर्वा और अपनी परंपरा के अनुसार मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।
- अंत में दीपक या कपूर से गणेश जी की आरती करें।
- भगवान गणेश से सुख, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
श्री गणेश जी की आरती का महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। भक्त मानते हैं कि गणेश जी की पूजा से शुभ कार्यों का आरंभ मंगलमय होता है। उनकी आरती गाने से मन में भक्ति और सकारात्मकता का भाव जागता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुबह और शाम की पूजा के समय गणेश जी की आरती की जा सकती है।
मोदक और लड्डू भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं।
बुधवार और गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।
ॐ गं गणपतये नमः भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंत्र है।
जय श्री गणेश!
हे विघ्नहर्ता भगवान गणेश, सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और सबके जीवन में सुख, शांति एवं मंगल प्रदान करें।
॥ गणपति बप्पा मोरया ॥
2. भगवान शिव की आरती – ॐ जय शिव ओंकारा
भगवान शिव की आरती – ॐ जय शिव ओंकारा
भगवान शिव हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर और नीलकंठ जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। पूजा के अंत में श्रद्धा के साथ ॐ जय शिव ओंकारा आरती गाने की परंपरा है।
भगवान शिव की संपूर्ण आरती
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज ते सोहे। तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ करमध्ये कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता। जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुण स्वामी की आरति जो कोई नर गावे। भक्ति भाव से गावे मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
भगवान शिव के प्रसिद्ध मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगवान शिव की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित करें।
- बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें।
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
- घी के दीपक या कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
- अंत में महादेव से सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
भगवान शिव की आरती का महत्व
भगवान शिव की आरती भक्तों के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाती है। शिवजी को भोलेनाथ कहा जाता है। भक्त सोमवार, सावन, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से उनकी पूजा और आरती करते हैं। शिव आरती के माध्यम से भक्त महादेव के निराकार और साकार स्वरूप का स्मरण करते हैं।
भगवान शिव की आरती कब करनी चाहिए?
भगवान शिव की आरती सुबह और शाम की पूजा के समय की जा सकती है। सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और प्रदोष व्रत के अवसर पर भी श्रद्धालु विशेष पूजा करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव की प्रसिद्ध आरती ॐ जय शिव ओंकारा है।
ॐ नमः शिवाय भगवान शिव का प्रसिद्ध पंचाक्षर मंत्र है।
सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि और सावन में भी विशेष पूजा का महत्व है।
भक्त अपनी पूजा परंपरा के अनुसार जल, बेलपत्र, पुष्प और फल अर्पित करते हैं।
जय श्री महाकाल
हे भगवान भोलेनाथ, अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें। सभी के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का प्रकाश फैलाएँ।
॥ हर हर महादेव ॥
3. भगवान विष्णु की आरती – ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु जी की आरती – ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। वे त्रिदेवों में से एक हैं और धर्म की रक्षा तथा संसार के पालन से जुड़े हैं। भगवान विष्णु के अनेक अवतारों में श्रीराम और श्रीकृष्ण विशेष रूप से पूजनीय हैं। गुरुवार, एकादशी और विशेष धार्मिक अवसरों पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। उनकी प्रसिद्ध आरती है – ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु जी की संपूर्ण आरती
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
भगवान विष्णु जी के प्रसिद्ध मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
भगवान विष्णु जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- पीले फूल, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
- भगवान विष्णु की आरती श्रद्धा के साथ गाएँ।
- अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
भगवान विष्णु जी की आरती का महत्व
भगवान विष्णु की आरती भक्तों को धर्म, सेवा, करुणा और सदाचार का स्मरण कराती है। विष्णु जी को पालनहार कहा जाता है। भक्त उनकी आरती करके अपने जीवन में शांति, भक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विष्णु जी की आरती कब करनी चाहिए?
भगवान विष्णु की आरती प्रतिदिन सुबह और शाम की पूजा में की जा सकती है। गुरुवार, एकादशी, देवउठनी एकादशी और वैकुंठ एकादशी जैसे अवसरों पर विशेष पूजा की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान विष्णु की प्रसिद्ध आरती ॐ जय जगदीश हरे है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंत्र है।
गुरुवार और एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।
भक्त अपनी परंपरा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक प्रसाद अर्पित करते हैं।
जय श्री हरि
हे भगवान विष्णु, अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें। सभी के जीवन में धर्म, शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रकाश फैलाएँ।
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
4. श्री कृष्ण जी की आरती – आरती कुंजबिहारी की
5. श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन – श्री राम स्तुति
6. हनुमान जी की आरती – आरती कीजै हनुमान लला की
7. माता दुर्गा की आरती – जय अम्बे गौरी
8. माता लक्ष्मी की आरती – ॐ जय लक्ष्मी माता
9. माता सरस्वती की आरती – जय सरस्वती माता
10. सूर्य देव की आरती
11. शनि देव की आरती
12. साईं बाबा की आरती
13. भगवान जगन्नाथ जी की आरती
14. माँ काली की आरती
15. भगवान दत्तात्रेय जी की आरती
आरती करने की विधि
पूजा स्थल को साफ करके दीपक या कपूर जलाएँ। अपने आराध्य देवी-देवता का ध्यान करें और श्रद्धा के साथ आरती गाएँ। आरती के बाद प्रणाम करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस पेज पर प्रमुख देवी-देवताओं की आरती एक ही स्थान पर पढ़ सकते हैं।
आरती भक्तिभाव से पूजा करने और अपने आराध्य का स्मरण करने की परंपरा है।
नहीं, भक्त अपनी श्रद्धा और घर की पूजा परंपरा के अनुसार आरती कर सकते हैं।
आरती के बाद प्रणाम करके अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
समापन
भगवान की आरती भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। आशा है कि यह आरती संग्रह आपकी दैनिक पूजा और धार्मिक जानकारी के लिए उपयोगी होगा। जय श्री महाकाल!
श्री राम जी की आरती – आरती कीजै श्री रघुवर जी की
भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। वे सत्य, धर्म, करुणा और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। श्री राम जी की आरती का पाठ राम नवमी, दीपावली, रामायण पाठ, सुंदरकांड और प्रतिदिन की संध्या पूजा में श्रद्धा के साथ किया जाता है। यहाँ श्री रघुवर जी की प्रचलित पारंपरिक आरती का पूरा पाठ दिया गया है।
श्री रघुवर जी की संपूर्ण आरती
आरती कीजै श्री रघुवर जी की
आरती कीजै श्री रघुवर जी की। सत चित आनंद शिव सुंदर की॥ दशरथ तनय कौशल्या नन्दन। सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥ अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन। मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥ आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥ निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि। सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥ हरण शोक-भय दायक नव निधि। माया रहित दिव्य नर वर की॥ आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥ जानकी पति सुर अधिपति जगपति। अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥ विश्व वन्द्य अनवद्य अमित गति। एक मात्र गति सचराचर की॥ आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥ शरणागत वत्सल व्रतधारी। भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥ नाम लेत जग पावनकारी। वानर सखा दीन दुख हर की॥ आरती कीजै श्री रघुवर जी की। सत चित आनंद शिव सुंदर की॥
श्री राम जी का प्रसिद्ध मंत्र
ॐ श्री रामाय नमः॥
श्री राम जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी का स्मरण करें।
- भगवान को पुष्प, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- श्री राम नाम मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- घी के दीपक या कपूर से भगवान श्री राम की आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और मंगल के लिए प्रार्थना करें।
श्री राम जी की आरती का महत्व
भगवान श्री राम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनकी आरती गाते समय भक्त उनके आदर्श स्वरूप का स्मरण करते हैं। राम नाम का स्मरण भारतीय भक्ति परंपरा में विशेष स्थान रखता है।
श्री राम जी की आरती कब करनी चाहिए?
श्री राम जी की आरती प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा में की जा सकती है। राम नवमी, विजयादशमी, दीपावली और रामायण या सुंदरकांड पाठ के समापन पर भी भक्त श्रद्धा से आरती करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
आरती कीजै श्री रघुवर जी की भगवान श्री राम की प्रसिद्ध पारंपरिक आरती है।
इस प्रचलित पाठ में एक मुख्य टेक और चार प्रमुख पद हैं।
यह गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध श्री राम स्तुति है। इसे पूजा में गाया जाता है, लेकिन यह आरती से अलग रचना है।
श्री राम जय राम जय जय राम एक प्रसिद्ध राम नाम मंत्र है।
जय श्री राम
हे प्रभु श्री राम, सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें। सबके जीवन में सत्य, प्रेम, शांति और धर्म का प्रकाश फैलाएँ।
॥ जय श्री राम ॥
भगवान विष्णु जी की आरती – ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। वे त्रिदेवों में से एक हैं और धर्म की रक्षा तथा संसार के पालन से जुड़े हैं। भगवान विष्णु के अनेक अवतारों में श्रीराम और श्रीकृष्ण विशेष रूप से पूजनीय हैं। गुरुवार, एकादशी और विशेष धार्मिक अवसरों पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। उनकी प्रसिद्ध आरती है – ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु जी की संपूर्ण आरती
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
भगवान विष्णु जी के प्रसिद्ध मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
भगवान विष्णु जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- पीले फूल, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
- भगवान विष्णु की आरती श्रद्धा के साथ गाएँ।
- अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
भगवान विष्णु जी की आरती का महत्व
भगवान विष्णु की आरती भक्तों को धर्म, सेवा, करुणा और सदाचार का स्मरण कराती है। विष्णु जी को पालनहार कहा जाता है। भक्त उनकी आरती करके अपने जीवन में शांति, भक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विष्णु जी की आरती कब करनी चाहिए?
भगवान विष्णु की आरती प्रतिदिन सुबह और शाम की पूजा में की जा सकती है। गुरुवार, एकादशी, देवउठनी एकादशी और वैकुंठ एकादशी जैसे अवसरों पर विशेष पूजा की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान विष्णु की प्रसिद्ध आरती ॐ जय जगदीश हरे है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंत्र है।
गुरुवार और एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।
भक्त अपनी परंपरा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक प्रसाद अर्पित करते हैं।
जय श्री हरि
हे भगवान विष्णु, अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें। सभी के जीवन में धर्म, शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रकाश फैलाएँ।
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
भगवान विष्णु जी की आरती – ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। वे त्रिदेवों में से एक हैं और धर्म की रक्षा तथा संसार के पालन से जुड़े हैं। भगवान विष्णु के अनेक अवतारों में श्रीराम और श्रीकृष्ण विशेष रूप से पूजनीय हैं। गुरुवार, एकादशी और विशेष धार्मिक अवसरों पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। उनकी प्रसिद्ध आरती है – ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु जी की संपूर्ण आरती
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
भगवान विष्णु जी के प्रसिद्ध मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
भगवान विष्णु जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- पीले फूल, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
- भगवान विष्णु की आरती श्रद्धा के साथ गाएँ।
- अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
भगवान विष्णु जी की आरती का महत्व
भगवान विष्णु की आरती भक्तों को धर्म, सेवा, करुणा और सदाचार का स्मरण कराती है। विष्णु जी को पालनहार कहा जाता है। भक्त उनकी आरती करके अपने जीवन में शांति, भक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विष्णु जी की आरती कब करनी चाहिए?
भगवान विष्णु की आरती प्रतिदिन सुबह और शाम की पूजा में की जा सकती है। गुरुवार, एकादशी, देवउठनी एकादशी और वैकुंठ एकादशी जैसे अवसरों पर विशेष पूजा की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान विष्णु की प्रसिद्ध आरती ॐ जय जगदीश हरे है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंत्र है।
गुरुवार और एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।
भक्त अपनी परंपरा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक प्रसाद अर्पित करते हैं।
जय श्री हरि
हे भगवान विष्णु, अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें। सभी के जीवन में धर्म, शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रकाश फैलाएँ।
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
हनुमान जी की आरती – आरती कीजै हनुमान लला की
भगवान हनुमान को संकटमोचन, बजरंगबली और पवनपुत्र के नाम से जाना जाता है। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त और शक्ति, साहस, भक्ति तथा सेवा के प्रतीक हैं। मंगलवार और शनिवार को भक्त विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा करते हैं। पूजा के अंत में श्रद्धा से हनुमान जी की आरती गाई जाती है।
श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥ अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतन के प्रभु सदा सहाई॥ आरती कीजै हनुमान लला की॥ दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ आरती कीजै हनुमान लला की॥ लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ आरती कीजै हनुमान लला की॥ पैठि पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ बाईं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ आरती कीजै हनुमान लला की॥ सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥ कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
हनुमान जी के प्रसिद्ध मंत्र
ॐ श्री हनुमते नमः॥
हनुमान जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- फूल, फल और अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें।
- हनुमान जी के मंत्र का श्रद्धा से जाप करें।
- हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।
- अंत में कपूर या दीपक से हनुमान जी की आरती करें।
- प्रभु श्रीराम और हनुमान जी से सुख-शांति की प्रार्थना करें।
हनुमान जी की आरती का महत्व
हनुमान जी की आरती भक्तों को साहस, सेवा, समर्पण और निष्ठा का संदेश देती है। वे भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। उनकी भक्ति हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
हनुमान जी की आरती कब करनी चाहिए?
हनुमान जी की आरती मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से की जाती है। भक्त प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा में भी उनकी आरती कर सकते हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर विशेष पूजा और आरती की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
आरती कीजै हनुमान लला की हनुमान जी की प्रसिद्ध आरतियों में से एक है।
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है।
ॐ हं हनुमते नमः हनुमान जी का प्रसिद्ध मंत्र है।
भक्त अपनी पारिवारिक और मंदिर की परंपरा के अनुसार बूंदी, लड्डू और फल अर्पित करते हैं।
जय बजरंगबली
हे संकटमोचन हनुमान जी, सभी भक्तों को साहस, सद्बुद्धि और भक्ति प्रदान करें। प्रभु श्रीराम के चरणों में हमारा प्रेम और विश्वास सदैव बनाए रखें।
माता दुर्गा की आरती – जय अम्बे गौरी
माता दुर्गा को आदिशक्ति, जगदम्बा और भवानी के नाम से जाना जाता है। वे शक्ति, साहस, करुणा और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, अष्टमी और अन्य शुभ अवसरों पर भक्त माता रानी की विशेष पूजा करते हैं। पूजा के अंत में श्रद्धा और भक्ति के साथ जय अम्बे गौरी आरती गाई जाती है।
माता दुर्गा की संपूर्ण आरती
जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय अम्बे गौरी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥ जय अम्बे गौरी॥ शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी॥ चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय अम्बे गौरी॥ ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे गौरी॥ चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय अम्बे गौरी॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता॥ जय अम्बे गौरी॥ भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ जय अम्बे गौरी॥ कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माता दुर्गा के प्रसिद्ध मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
माता दुर्गा की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माता को अपनी परंपरा के अनुसार लाल फूल, चुनरी और फल अर्पित करें।
- दुर्गा मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं।
- घी के दीपक या कपूर से माता रानी की आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
माता दुर्गा की आरती का महत्व
माता दुर्गा की आरती भक्तों में साहस, शक्ति, श्रद्धा और आत्मविश्वास का भाव जगाती है। माता को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। भक्त उनकी आराधना करके जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
माता दुर्गा की आरती कब करनी चाहिए?
माता दुर्गा की आरती प्रतिदिन सुबह और शाम की पूजा में की जा सकती है। नवरात्रि के नौ दिनों, दुर्गा अष्टमी, महानवमी और दुर्गा पूजा के अवसर पर विशेष रूप से आरती की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
जय अम्बे गौरी माता दुर्गा की प्रसिद्ध आरती है।
ॐ दुं दुर्गायै नमः माता दुर्गा का प्रसिद्ध मंत्र है।
सुबह और शाम की पूजा में माता दुर्गा का स्मरण और आरती की जा सकती है।
नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा और आराधना करते हैं। आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जय माता दी
हे जगदम्बे माता, अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें। सभी को साहस, सद्बुद्धि, सुख और शांति प्रदान करें।
