भूमिका
“ॐ नमः शिवाय” भारत की प्राचीनतम और पवित्रतम मंत्र-परंपराओं में से एक है। इसे पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है क्योंकि इसमें पाँच मुख्य अक्षर—न, म, शि, वा, य—शामिल हैं। हिंदू धर्म में यह मंत्र शिव भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। भक्तों का विश्वास है कि “ॐ नमः शिवाय” के नियमित जाप से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं, आत्मा शुद्ध होती है, और व्यक्ति महादेव की दिव्य शक्ति से जुड़ जाता है। यह केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण आध्यात्मिक अनुभव है जो साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर संतुलन प्रदान करता है।
1. “ॐ नमः शिवाय” का अर्थ और दार्शनिक व्याख्या
“ॐ नमः शिवाय” का सीधा अर्थ है—
“मैं शिव को नमन करता हूँ। मैं शिव (अर्थात् कल्याण) को प्रणाम करता हूँ।”
(अ) “ॐ” का महत्व
- “ॐ” ब्रह्मांड का मूल नाद माना गया है।
- यह तीन अक्षरों—अ, उ, म—से बना है, जो त्रिमूर्ति—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- यह ध्वनि ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर उसके विस्तार तक का प्रतीक है।
(ब) “नमः”
- नमः का अर्थ है—नमन, समर्पण या अहंकार का त्याग।
- जब साधक नमः कहता है तो वह अपने भीतर की सारी नकारात्मकता को समर्पित कर देता है।
(स) “शिवाय”
- “शिव” शब्द का अर्थ है—कल्याणकारी, शुभ, पवित्र और आनंदमय।
- “शिवाय” का तात्पर्य है—शिव की महाशक्ति से जुड़ना।
इस प्रकार, “ॐ नमः शिवाय” हमें बताता है कि—
जब हम अपने अहंकार को त्यागकर परम कल्याणकारी सत्ता के प्रति समर्पित होते हैं, तब हमारा जीवन दिव्यता से भर जाता है।

2. पंचाक्षरी मंत्र क्यों कहा जाता है?
“ॐ” के बिना मूल मंत्र है—
नमः शिवाय
इस मंत्र के पाँच अक्षर—
- न
- म
- शि
- वा
- य
हिन्दू शास्त्रों में ये पाँच अक्षर पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं—
- न → पृथ्वी
- म → जल
- शि → अग्नि
- वा → वायु
- य → आकाश
यह मंत्र पंचतत्वों का संतुलन बनाकर साधक को प्रकृति की ऊर्जा से जोड़ देता है।
3. c
“ॐ नमः शिवाय” का उल्लेख कई वेदों, उपनिषदों और पुराणों में मिलता है।
(अ) यजुर्वेद
यजुर्वेद में यह मंत्र शिव की सर्वोच्च उपासना का माध्यम बताया गया है।
(ब) शिवपुराण
शिवपुराण में कहा गया है कि—
“पंचाक्षर मंत्र शिव का हृदय है।”
अर्थात्, जो व्यक्ति इस मंत्र का सच्चे मन से जाप करता है, वह शिव के हृदय से जुड़ जाता है।
(स) रुद्राक्ष और पंचाक्षरी मंत्र
रुद्राक्ष का संबंध भी पंचाक्षरी मंत्र से है। रुद्राक्ष धारण कर इस मंत्र का जाप करने से साधक का मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है।
4. मंत्र जाप की पद्धति
“ॐ नमः शिवाय” किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी समय जपा जा सकता है। फिर भी सही विधि से जाप करने पर फल अधिक मिलता है।
मंत्र जाप की विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शांत स्थान पर आसन बिछाकर बैठें।
- सामने शिवलिंग या महादेव की मूर्ति रखें (ऐच्छिक)।
- रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
- मंत्र को स्पष्ट उच्चारण के साथ बोलें—
“ॐ नमः शिवाय” - कम से कम 108 बार जाप करने का नियम रखें।
- जाप के दौरान मन भटकने न दें।
- अंत में शिव को जल अर्पित करें।
5. “ॐ नमः शिवाय” के आध्यात्मिक लाभ
(अ) मन की शांति
यह मंत्र मन को शांत कर तनाव, चिंता और अवसाद को दूर करता है।
(ब) आत्मविश्वास में वृद्धि
इसका नियमित जाप साधक के मन को स्थिर करता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
(स) नकारात्मक ऊर्जा का नाश
मंत्र की ध्वनि तरंगें नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देती हैं।
(द) मनोकामनाओं की पूर्ति
शिव दयानिधि हैं। भक्तों की सच्ची प्रार्थना को वे अवश्य सुनते हैं।
(इ) ध्यान और योग में सहायक
योग साधना में इस मंत्र का उपयोग मन को एकाग्र करने हेतु किया जाता है।
(फ) कर्म बंधनों से मुक्ति
मंत्र का जाप व्यक्ति को पाप और कर्मबद्धता से मुक्त कर देता है।
6. वैज्ञानिक दृष्टि से “ॐ नमः शिवाय” का प्रभाव
आज विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि मंत्रों की ध्वनि तरंगें मन और शरीर पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
(अ) मस्तिष्क पर प्रभाव
- ध्वनि कंपन हाइपोथैलेमस को सक्रिय करते हैं।
- तनाव कम होता है और ‘सेरोटोनिन’ बढ़ता है।
- मन में प्रसन्नता और सुकून का अनुभव होता है।
(ब) वाइब्रेशन थेरेपी
“ॐ” के उच्चारण से निकलने वाली ध्वनि तरंगें शरीर के प्रत्येक कोशिका तक पहुँचती हैं और ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करती हैं।
(स) हृदय और श्वास प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव
लयबद्ध मंत्र जाप से श्वास क्रम सही होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
7. शिव भक्तों के अनुभव
शिव भक्ति अनुभव-आधारित होती है। अनेक भक्तों का कहना है कि—
- मंत्र जाप से कठिन परिस्थितियाँ आसान हो जाती हैं।
- मन में निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
- जीवन में अनपेक्षित चमत्कार होते हैं।
- घर में सुख-शांति बढ़ती है।
ब्रह्ममुहूर्त में जाप करने से यह प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
8. “ॐ नमः शिवाय” और रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक में इस मंत्र का अत्यंत महत्व है।
रुद्राभिषेक के समय—
- जल
- दूध
- दही
- शहद
- गंगा जल
- बेल पत्र
- धतूरा
अर्पित करते हुए मंत्र का जाप किया जाता है।
यह माना जाता है कि रुद्राभिषेक से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में कल्याण का मार्ग खुलता है।
9. जीवन में सकारात्मक परिवर्तन
जिन लोगों ने इस मंत्र को अपने जीवन की दिनचर्या में शामिल किया है, उन्होंने जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन महसूस किए हैं—
- क्रोध कम होना
- परिवार में सामंजस्य बढ़ना
- कार्यों में सफलता
- स्वास्थ्य में सुधार
- कर्म योग के प्रति जागृति
10. शिव तत्त्व का गहरा अर्थ
“शिव” कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि एक ऊर्जा, एक अवधारणा, एक तत्त्व हैं—
- वे समस्त सृष्टि के परम कारण हैं।
- वे संहार करते हैं, लेकिन नई सृष्टि का मार्ग भी खोलते हैं।
- वे योगी भी हैं और गृहस्थों के रक्षक भी।
- वे क्रोध के देव भी हैं और प्रेम के सागर भी।
“ॐ नमः शिवाय” हमें शिव के इसी तत्त्व से जोड़ता है।
11. मंत्र जाप और नियम
क्या करें?
- सच्चे मन से जाप
- नियमितता
- शुद्ध आचरण
- सत्य बोलना
- जीवों पर दया
क्या न करें?
- क्रोध में जाप
- अपवित्र वातावरण
- बिना अनुमति मंदिर में ऊँची आवाज़
12. निष्कर्ष
“ॐ नमः शिवाय” ऐसा मंत्र है जो मन, शरीर और आत्मा तीनों को संतुलन प्रदान करता है। यह मंत्र सिर्फ भक्तों का नहीं, बल्कि योगियों, साधकों और वैज्ञानिकों का भी प्रिय है।
यह मंत्र हमें शिव के पवित्र तत्त्व से जोड़ता है और जीवन को पवित्र मार्ग पर ले जाता है।
अंत में—
“ॐ नमः शिवाय” केवल उच्चारण नहीं, बल्कि एक अनुभूति है, एक साधना है, एक शक्ति है।
जो भी इस मंत्र का सच्चे मन से जाप करता है, महादेव उसे निराश नहीं करते।










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