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    जानें सही विधि और जरूरी नियम

    रक्षाबंधन पर पहले तिलक या राखी ?

    रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के पवित्र रिश्ते का पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। हिंदू परंपरा में राखी बांधने की रस्म के साथ तिलक, अक्षत, आरती और मिठाई का भी विशेष महत्व माना जाता है।

    कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि राखी बांधते समय पहले तिलक किया जाता है या पहले राखी बांधी जाती है? आइए जानते हैं रक्षाबंधन की पारंपरिक पूजा-विधि और इससे जुड़े जरूरी नियम।

    रक्षाबंधन पर पहले तिलक या राखी ?

    रक्षाबंधन की सामान्य धार्मिक परंपरा के अनुसार सबसे पहले भाई को तिलक लगाया जाता है और उसके बाद राखी बांधी जाती है।

    बहन भाई को अपने सामने बैठाकर सबसे पहले उसके माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक करती है। इसके बाद तिलक पर अक्षत यानी चावल लगाए जाते हैं। माना जाता है कि अक्षत शुभता और मंगल का प्रतीक हैं।

    तिलक और अक्षत के बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि, सफलता और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती है।

    इसके बाद भाई की आरती उतारी जाती है और उसे मिठाई खिलाई जाती है। भाई अपनी बहन को स्नेहपूर्वक उपहार देकर उसकी रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है।

    रक्षाबंधन की पूजा थाली में क्या रखें?

    राखी की थाली को शुभ सामग्री से सजाने की परंपरा है। इसमें सामान्यतः ये चीजें रखी जा सकती हैं:

    • राखी
    • रोली या कुमकुम
    • अक्षत यानी चावल
    • दीपक
    • पूजा की थाली
    • मिठाई
    • पुष्प
    • जल
    • भाई के लिए शुभ उपहार

    आप चाहें तो थाली में भगवान गणेश और अपने इष्ट देव का स्मरण करके पूजा की शुरुआत कर सकते हैं।

    रक्षाबंधन की सही विधि

    सबसे पहले भाई को स्वच्छ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाया जा सकता है। इसके बाद बहन पूजा की थाली लेकर भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाए।

    तिलक के बाद अक्षत लगाएं और फिर भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय मन में भाई के मंगल और सुखी जीवन की कामना करें।

    इसके बाद दीपक से भाई की आरती करें और उसे मिठाई खिलाएं। अंत में भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करता है।

    रक्षाबंधन पर किन बातों का ध्यान रखें ?

    राखी बांधते समय स्वच्छता और पूजा की पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। राखी की रस्म जल्दबाजी में करने के बजाय श्रद्धा और प्रसन्न मन से करना शुभ माना जाता है।

    परिवार में चली आ रही परंपराओं का भी सम्मान करना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में राखी बांधने की विधि में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

    रक्षाबंधन पर महाकाल से करें भाई की मंगलकामना

    रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बहन अपने भाई के सुखी और सुरक्षित जीवन के लिए भगवान शिव और महाकाल का स्मरण कर सकती है। श्रद्धा से महाकाल का ध्यान करते हुए भाई की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सफलता की प्रार्थना करना भक्तिभाव को और गहरा करता है।

    हर हर महादेव।

    निष्कर्ष

    रक्षाबंधन की सामान्य पूजा-विधि में पहले तिलक और अक्षत लगाए जाते हैं, फिर राखी बांधी जाती है, इसके बाद आरती और मिठाई की रस्म होती है। हालांकि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव संभव है।

    रक्षाबंधन का वास्तविक महत्व विधि से अधिक भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति शुभ भावना में है।

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